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दीवाली जिसे दीपावली या दीपदान उत्सव भी कहा जाता है क्यों मनाया जाता है


भारत का एक प्रमुख और पवित्र पर्व है। इसे अंधकार पर प्रकाश की विजय, अज्ञान पर ज्ञान की जीत और बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है।

दीवाली मनाने के कुछ प्रमुख कारण:

1. श्रीराम के अयोध्या से लौटने की खुशी में

  • जब राम 14 वर्षों का वनवास पूर्ण करके और रावण का वध करके अयोध्या लौटे, तब अयोध्या वासियों ने उनका दीप जलाकर स्वागत किया।
  • तभी से यह दिन दिवाली उत्सव कहलाया यानी के प्रकाश फैलाने वाला त्योहार।

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2. अंधकार पर प्रकाश की विजय प्राप्त का प्रतीक

  • दीपक जलाना हमे यह संदेश देता है कि हमें अपने जीवन से अंधकार (अज्ञान, नकारात्मकता, बुराई) को मिटाकर ज्ञान और अच्छाई व सकारात्मकता फैलानी चाहिए।

3. लक्ष्मी की पूजा

  • इस दिन कहा जाता है की जो धन की देवी हैं लक्ष्मी उनकी पूजा की जाती है ताकि घर में संपन्नता और सौभाग्य बना रहे।
  • कहा यह भी जाता है कि लक्ष्मी उसी घर में प्रवेश करती हैं जो प्रकाशमान, स्वच्छ व सद्भावनापूर्ण हो।

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4. महावीर स्वामी जयंती व ज्ञान दिवस (जैन धर्म)

  • जैन धर्म में यह दिन महावीर स्वामी के निर्वाण दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।

5. सिख परंपरा में भी इसका महत्व

  • सिखों के लिए भी यह दिन गुरु हरगोबिंद जी की जेल से मुक्ति मिली थी तभी से मुक्ति दिवस के रूप में “बंदी छोड़ दिवस” कहलाया जाता है।

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निष्कर्ष:

दीवाली को दीपदान उत्सव इसलिए भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन हम अपने घरों में दीप जलाकर रौशनी उजागर व अंधकार दूर करते हैं, जैसे ज्ञान से अज्ञान दूर होता है, अच्छाई से बुराई मिटती है।
लेकिन आज के समय में इसका कुछ उल्टा ही होने लगा है क्योकि आज के समय में मनुष्य इतना अज्ञानी हो गया है की ज्ञान होते हुए भी अज्ञानी जैसा बर्ताव करता है और अच्छाई और सच्चाई तो मानो खत्म सी होती जा रही है कोई सच नहीं बोल रहा सब झूट का सहारा लेकर जी रहे है लेकिन ऐसा क्यों क्या अगर हम झूट न बोलेन तो क्या हमको कोई जैसे मार देगा अगर नहीं तो हम झूट बोलते ही क्यों हैं अपने आप से सवाल करो की जब हमको कोई सच बोलने पे जैसे नहीं मरेगा तो हम झूट का सहारा क्यों ले रहे हैं।

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