
“एक बार का फैसला”
राहुल एक छोटे से गाँव का लड़का जो की गरीब परिवार से था। उसके सपने बड़े थे, पर उसकी परिस्थितियाँ उसके सपनों के बराबर नहीं थीं। गाँव में ज्यादातर बच्चे खेतों में मदद करते, और स्कूल में अधिक से अधिक 2-3 घंटे ही पढ़ाई कर पाते थे। राहुल के घर की हालत भी कुछ खास ठीक नहीं थी। माँ-बाप बहुत मेहनत करते, पर ज्यादा पैसा नहीं था।
राहुल का दिमाग तेज था, पर वह अक्सर स्कूल में ज्यादा ध्यान नहीं देता। उसका मोबाइल, दोस्तों के साथ समय बिताना और खेल-कूद उसका ज़्यादा समय ले जाते। वह अक्सर कहता,
“कल से पढ़ाई करूंगा, आज तो थोड़ा आराम कर लेना चाहिए।”
और ऐसे ही दिन बीत जाते।
एक दिन स्कूल में एक नए शिक्षक आए — श्री शर्मा। उन्होंने राहुल को अलग नजर से देखा। उन्होंने कक्षा में कहा:
“बच्चो, दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं — एक जो सपने देखते हैं और एक जो सपनों को पूरा करते हैं। अगर आज तुम अपने सपनों के लिए थोड़ी सी मेहनत करोगे, तो कल तुम्हारे सपने तुम्हें गले लगाएँगे।”
राहुल के दिल में कुछ हलचल हुई। पर फिर भी वह सर की बात से पूरी तरह प्रेरित नहीं हुआ।
स्कूल के बाद वह घर गया और टीवी और मोबाइल के सामने बैठ गया। माँ ने देखा और धीरे से कहा:
“बेटा, समय बहुत कीमती है। आज का हर पल कल को बनाता है। अगर आज मेहनत नहीं करोगे, तो कल तुम्हें अपने हालात पर पछतावा होगा।”
राहुल ने माँ की बात को नजरअंदाज किया, पर उसी रात उसके सपनों में एक अजीब सपना आया। उसने अपने जीवन का 10 साल बाद का भविष्य सपना देखा। उसने देखा कि उसके दोस्त इंजीनियर, डॉक्टर और ऑफिसर बन गए हैं। और वह खुद एक छोटी दुकान चला रहा है, रोज़ मेहनत कर रहा है और सोच रहा है कि काश स्कूल में पढ़ाई पर थोड़ा ध्यान दिया होता, तो आज वह और आगे होता। राहुल की आँखों में आँसू आ गए। उसने सोचा,
“नहीं! मैं ऐसा नहीं चाहता। मैं अपने सपनों को सच करूँगा।”
अगली सुबह राहुल स्कूल गया और श्री शर्मा के पास गया। उसने कहा:
“सर, मुझे आपकी मार्गदर्शन चाहिए। मैं अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना चाहता हूँ।”
श्री शर्मा ने मुस्कुराते हुए कहा:
“बेटा, तुम्हारा फैसला तुम्हारी सफलता की शुरुआत है। बस लगातार मेहनत करते रहो, और हार मत मानो।”
राहुल ने दिन-रात पढ़ाई शुरू कर दी। वह अपनी कमजोरियों पर काम कर रहा था, हर विषय को समझने की कोशिश कर रहा था, और कभी भी हार नहीं माना। पहले दो महीने मुश्किल थे। उसके दोस्त मज़ाक उड़ाते, कहते,
“अरे राहुल, चिल कर यार, अभी जवान हो, पढ़ाई में क्या करोगे?”
पर राहुल बस अपने सपनों पर ध्यान देता रहा।
छह महीने बाद स्कूल के परीक्षा में राहुल का परिणाम टॉप में था। उसके शिक्षक और माता-पिता बहुत खुश हुए। राहुल को समझ आया कि
मेहनत का फल हमेशा मिलता है, चाहे शुरुआत में मुश्किल लगे।
फिर राहुल ने सोचा,
“बस स्कूल तक ही नहीं, मैं अपने सपनों के लिए कुछ बड़ा करना चाहता हूँ।”
उसने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी और दिन-रात म्हणत से पढ़ाई की। उसके साथ संघर्ष भी हुआ, कभी-कभी आत्मविश्वास गिरता, कभी प्रेरणा खत्म होती। पर वह अपने सपनों को याद करता और खुद से कहता:
“मैं अपने सपनों का सृजनकर्ता हूँ, मैं हार नहीं मान सकता।”
आज राहुल एक सफल इंजीनियर है, जिसे दुनिया में लोग सम्मान देते हैं। और जब भी वह सोचता है कि उसने अपने सपनों को कैसे पूरा किया, उसके दिल में कृतज्ञता होती है —
उस दिन के फैसले के लिए, जिसने उसकी ज़िंदगी बदल दी थी।
कहानी का संदेश:
- सपने सिर्फ देखने से नहीं पूरे होते, मेहनत और लगन से पूरे होते हैं।
- कल का इंतजार मत करो, आज का हर पल आपका भविष्य बनाता है।
- संघर्ष और असफलता से मत डरें, ये आपको मजबूत और स्मार्ट बनाते हैं।
- ध्यान और लगातार मेहनत ही सफलता की कुंजी है।
- अगर आप आज पढ़ाई में मन लगाएँ, तो कल के सपने हकीकत बनेंगे।
“एक छोटी सी मेहनत आज, कल का बड़ा सपना बनाती है।”


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